उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ किसी से मिलते जुलते नहीं हैं ! सार्वजनिक तौर पर उनका देखा जाना ईद के चांद से भी ज्यादा दुर्लभ क्षण होता है ! कानून व्यवस्था आए दिन रसातल को जा रही है.
पुलिस मुख्यालय के नाम पर देहरादून में एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर दो भव्य भवन हैं, जहां डीजीपी समेत तमाम अफसरान के लिए आलीशान कमरे हैं. लेकिन दीपम सेठ की अगुवाई में दो भवनों वाले पुलिस हेडक्वार्टर से केंद्र को एक सूची समय पर नहीं भेजी गयी और इस सूची के न भेजे जाने के कारण इस साल उत्तराखंड के किसी पुलिस कर्मी को केंद्रीय पदक नहीं मिल सका !
करते क्या हैं दीपम सेठ साहब आप उन दो भवनों की तन्हाइयों में ! फाइलें आपके यहां से चलती नहीं, ट्विटर यानि एक्स पर आखिरी रिट्वीट आपने 8 सितंबर 2024 को किया था, जब आप एसएसबी में थे, ट्वीट तो आपने एक भी नहीं किया. इस राज्य में वापस लौटने के महीनों बाद उस एक्स खाते के बायो में डीजीपी उत्तराखंड जरूर लिखवा दिया ! अपना सरकारी नंबर आप किसी को बताना नहीं चाहते, इसलिए उत्तराखंड पुलिस की वेबसाइट से आपने बाकी अफसरों के सरकारी नंबर भी हटवा दिये !
चलिए किसी से मिलते- जुलते नहीं, बात नहीं करते, कम से कम केंद्रीय पदकों के लिए नामों की सूची ही समय पर भिजवा देते ! वो भी आपके नेतृत्व में नहीं हो सका ! यह ख्याति या कुख्यति दीपम सेठ साहब के नाम पर दर्ज होगी कि उनके डीजीपी रहते 2026 में उत्तराखंड के एक भी पुलिस कर्मी को केंद्रीय पदक नहीं मिल सका क्योंकि जिस पुलिस मुख्यालय में सबसे बड़े अफसर के तौर पर विराजने के लिए वे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर से वापस आए, उस पुलिस मुख्यालय ने केंद्र को समय पर सूची ही नहीं भेजी ! दीपम सेठ साहब और उनका पुलिस मुख्यालय अपने पुलिस कर्मियों को केंद्रीय मेडल दिलाने के प्रति गंभीर नहीं है तो जनता के प्रति वे कितने गंभीर होंगे, समझा जा सकता है !
-इन्द्रेश मैखुरी


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