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क्या यह जेन जी के खिलाफ हिंसा का आह्वान है ?

  प्रसिद्ध वेब सीरीज " मिर्जापुर " का एक यह अंश तो आपने देखा ही होगा, जिसमें बाहुबली कालीन भैया का गुंडा बेटा- मुन्ना भैया अपने खिलाफ छात्र संघ चुनाव में खड़े होने वाले एक छात्र को क्लास में घुस कर पीट रहा है और कह रहा है कि - पचास बार बोलें हैं, पढ़ने- लिखने वाले छात्रों को राजनीति से दूर रहना चाहिए, अबे पढ़ाई- लिखाई में ध्यान लगाओ, आई ए- वाई ए एस बनो ! 






छत्तीसगढ़ भाजपा ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट्स और हैंडल्स पर यह वीडियो पोस्ट किया है. उसमें छत्तीसगढ़ भाजपा ने इतना काम जरूर किया है कि पिटने वाले छात्र के सिर के ऊपर - दिमागी नक्सल- लिख दिया है ! और साथ में कैप्शन लिखा है कि - दिमागी नक्सल होने के बजाय आप वो कोई हो सकते हैं, जो राष्ट्र की प्रगति में भागीदार बने ! 





तो क्या छत्तीसगढ़ भाजपा इस तरह की गुंडई और मारपीट को राष्ट्र की प्रगति में हिस्सेदार होना समझती है और जो इस तरह की गुंडई और मारपीट नहीं करते, वे सब उनकी निगाह में दिमागी नक्सल हैं ! छत्तीसगढ़ भाजपा के ही नेता दीपक महास्के अब भाजपा के राष्ट्रीय आईटी सेल के कर्ता- धर्ता बनाए गए हैं . तो क्या महास्के की सदारत में भाजपा आईटी सेल यह खुली वकालत कर रहा है कि अपने विरोधियों को, अपने से सहमत न होने वालों पर दिमागी नक्सल का लेबल चस्पा करके सरेआम पीटा जाना चाहिए ? वीडियो में भाजपा आईटी सेल ने पिटने वाले छात्र को दिमागी नक्सल बता कर, मारपीट करने वाले को नायक की तरह पेश करने की कोशिश की है ! तो क्या ऐसे गुंडे और मारपीट करने वाले ही भाजपा के हीरो हैं ? जो वीडियो छत्तीसगढ़ भाजपा आईटी सेल ने पोस्ट किया है, उसमें उनका हीरो सामने वाले को इसीलिए पीट रहा है क्योंकि वह पढ़ने- लिखने वाला हो कर भी राजनीति से दूर नहीं रह रहा है ! क्या भाजपा यह मानती है कि पढ़ने- लिखने वालों को राजनीति से दूर रहना चाहिए और गुंडे- बदमाशों- लफंगों- मवालियों को ही राजनीति के नजदीक रहना चाहिए ? 


उस समूचे जेन जी को, जिसने पेपर लीक,शिक्षा, रोजगार और जवाबदेही के मसले पर आंदोलन किया, इस पोस्ट में उस समूचे जेन जी को ऐसे ही पीटने की वकालत की जा रही है ? 


इस वीडियो को भाजपा द्वारा अपने राजनीतिक विरोधियों के विरुद्ध हिंसा का खुला आह्वान क्यों नहीं समझा जाना चाहिए और विरोधियों के खिलाफ हिंसा करने का खुला आह्वान करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही क्यों नहीं होनी चाहिए ? 


-इन्द्रेश मैखुरी

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