"यो डाना का पारा,देखीं च न्यारा न्यारा
जब तू ऐ जै छौ, ऐ जो छौ बहारा
या तेरो कुमाऊं, वा मेरो गढ़वाला
घोड़ी चढ़ी ऊंलो, लिजोलो दगाड़ा"
https://youtu.be/FSaCC9IGbdI?si=ZAvqbfkbGXCOgNoY
पहली कुमाऊंनी फिल्म " मेघा आ " के इस युगल गीत में उनकी आवाज़ पहली बार सुनी थी. दूरदर्शन पर यह फिल्म प्रसारित हुई, फिल्म तो भाषाई समझ न होने के चलते बहुत समझ नहीं पाया पर जेहन में यह युगल गीत और इसका पुरुष स्वर रह गया. फिर पुरुष स्वर का नाम भी पता चल गया - दीवान कनवाल !
अरसे तक उनका कोई और गीत नहीं सुना. एक बार किसी स्टेज कार्यक्रम में उन्हें प्रत्यक्ष गाते हुए देखा तो फिर रोमांच हुआ कि ये तो "मेघा आ" वाले गायक हैं.
यूट्यूब, फेसबुक का दौर आया तो उनको कुछ और गीत गाते सुना.
फिर एक दिन वह बहुचर्चित वीडियो आया जिसमें हीरा सिंह राणा जी से बेहद मिलती जुलती आवाज़ वाले डॉ अजय ढौंडियाल के साथ दीवान कनवाल, कुमाऊंनी के ख्यातिलब्ध कवि शेर दा अनपढ़ की रचना को बेहद सुरीले - कर्णप्रिय अंदाज में गा रहे हैं :
"द्वी दिना का ड्यर शेरुआ ये दुनी में
ना त्यार, ना म्यार शेरुआ ये दुनी में"
https://youtu.be/-q-1ISM-HO8?si=8DA3c8bV7N990awu
उसके बाद तो दीवान कनवाल और अजय ढौंडियाल ने पुराने गीतों को नये रूप में लाने की जैसे झड़ी लगा दी. उत्तराखंडी गीत संगीत के क्षेत्र में यह अभिनव प्रयोग था, जहां दो पुरुष गायक जोड़ीदार के रूप में गा रहे हैं और जोड़ी का नाम हुआ : अजय- दीवान. गढ़वाल और कुमाऊं के भेद को संगीत से पाटती जोड़ी.
कुछ दिन पहले डॉ अजय ढौंडियाल के फेसबुक पोस्ट में ही पढ़ा कि दीवान दा का हल्द्वानी में कोई ऑपरेशन होने वाला है. आज सुबह अचानक खबर आई की दीवान कनवाल नहीं रहे !
यह एक सुरीले स्वर का अवसान तो है ही, यह उस जोड़ी का टूटना भी है, जिसकी सुरीली सुर धारा में उत्तराखंड के संगीत प्रेमियों ने अभी गोते लगाना शुरू ही किया था.
अलविदा दीवान दा, आपके गीत हमेशा आपको जिंदा रखेंगे.
-इन्द्रेश मैखुरी



1 Comments
शान्ति 🙏🏻🙏🏻
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