प्रति,
श्रीमान मुख्यमंत्री महोदय,
उत्तराखंड शासन देहरादून
श्रीमान मुख्य सचिव महोदय,
उत्तराखंड सचिवालय, देहरादून.
जिलाधिकारी महोदया,
पौड़ी गढ़वाल.
महोदय / महोदया,
आपका ध्यान एक बहुत गंभीर मसले की ओर आकर्षित करना है.
दिवंगत अंकिता भंडारी के न्याय के मसले पर पूरा उत्तराखंड बेहद संवेदनशील है. इस मामले में राज्य सरकार ने समय- समय पर कई घोषणाएं की हैं.
लेकिन यह अफसोस की बात है कि पौड़ी जिले के डोभ- श्रीकोट गांव में रहने वाले अंकिता भंडारी के माता- पिता: श्रीमती सोनी देवी और श्री वीरेंद्र सिंह भंडारी को मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं.
एक क्रूर आपराधिक घटनाक्रम में अपनी पुत्री को खोने वाले इन माता- पिता को कम से कम पीने का साफ पानी तो राज्य सरकार और प्रशासन को उपलब्ध करवाना चाहिए.
" हर घर नल- हर घर जल" का सरकारी नारा तो पिछले कई वर्षों से पूरे देश में सुना जा रहा है. यह प्रश्न उत्पन्न होता है कि "हर घर" की इस परिभाषा में श्रीमती सोनी देवी और श्री वीरेंद्र सिंह भंडारी का घर क्यों नहीं आ पा रहा है ?
मुकम्मल इंसाफ की बात तो दूर की कौड़ी है, लेकिन क्या अपनी बेटी को एक क्रूर आपराधिक घटनाक्रम में खोने वाले माता- पिता को राज्य सरकार और प्रशासन पीने का साफ पानी भी मुहैया नहीं करा सकता ? इस संदर्भ में श्रीमती सोनी देवी और श्री वीरेंद्र सिंह भंडारी तथा सामाजिक संगठनों की ओर से पत्राचार किया जा चुका है,लेकिन अब तक कोई नतीजा नहीं निकला है.
यह कैसी विडंबना है कि देश की आज़ादी के 78 साल बाद और उत्तराखंड बनने के 26 वर्ष बाद भी पीने के साफ पानी के लिए गुहार लगानी पड़े और तब भी नतीजा न निकले !
उम्मीद है कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, इस प्रकरण में त्वरित कदम उठाते हुए आप अपने अधीनस्थों को श्रीमती सोनी देवी और श्री वीरेंद्र सिंह भंडारी को पीने के साफ पानी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित करेंगे ताकि इन्हें लोगों से पीने का साफ पानी मांगने के कष्ट से निजात मिल सके.
सधन्यवाद,
सहयोगाकांक्षी,
-इन्द्रेश मैखुरी
राज्य सचिव, भाकपा (माले)
उत्तराखंड.
(यह पत्र ई मेल और व्हाट्स ऐप के जरिये भेज दिया गया है)



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