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तरुण की हत्या के खिलाफ, नफ़रतियों के साथ कतई नहीं !

 दिल्ली के उत्तम नगर में तरुण नाम के युवा की हत्या कर दी गयी. हत्या की जो भी वजह हो पर हत्या एक जघन्य अपराध है, इसके लिए जो भी जिम्मेदार हैं, उन सबको कानून के अनुसार कठोरतम सजा होनी चाहिए. 


शुरुआती चर्चा में तरुण की हत्या की वजह हिंदू- मुस्लिम धार्मिक झगड़ा बताया गया, लेकिन दिल्ली पुलिस कह रही है कि मामला धार्मिक नहीं आपसी दुश्मनी का है. 





मामला जो भी हो, उसमें एक युवक की जान गयी, यह निंदनीय है. पुलिस से तो सवाल यह है कि अपराध रोकने में वह नाकाम क्यों है ? 

 यह हैरत की बात है कि जो यहां- वहां, इस- उस से पूछते फिर रहे हैं कि उत्तम नगर के तरुण के मामले में क्यों नहीं बोल रहे हो, उनमें से कोई सरकार या पुलिस से सवाल पूछने की जहमत नहीं उठा रहा है या हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है कि इस तरह से देश की राजधानी में घेर करके एक युवा को मारा गया तो आपका पूरा तंत्र कहां था  !  असल में जो भी ऐसे लोग हैं, उनके लिए यह सवाल पूछने का नहीं नफरत की आग को और भड़काने का अवसर है, इसलिए वे सिर्फ ऐसे ही लोगों से सवाल करेंगे, जो नफरत के खिलाफ हैं  ! वे असल में नौजवान की मृत्यु के बारे में सवाल नहीं पूछ रहे हैं, वे तो कह रहे हैं कि जब चारों ओर नफरत का ऐसा बोलबाला है, नफरत की आग पूरे मुल्क में प्रचंड तौर पर धधकाई जा रही है तो तुम इस नफरत की पलटन में क्यों नहीं शामिल होते, तुम इसके खिलाफ क्यों हो  ! 




तरुण की हत्या के खिलाफ हो कर भी हम, नफरतियों के साथ नहीं हैं क्योंकि हम तो तरुण की हत्या के खिलाफ हैं और लखनऊ में मार डाले गए 12 साल के उनैज की हत्या के विरुद्ध भी हैं. 






लेकिन जिनका खून अपराध पर नहीं अपराधी का धर्म देख कर खौलता है, न वे हमारे साथ हो सकते हैं, न हम उनके. नफरत में रोम- रोम गर्क कर चुके वे, हमसे पूछते हैं कि अलां पर क्यों नहीं बोलते, फलां पर क्यों नहीं बोलते  ! अरे हम तो दुनिया भर के मसलों पर यथासंभव बोलते हैं, तुम बताओ, तुम सिर्फ वहीं क्यों बोलते हो, जहां नफरत फैलाने की गुंजाइश हो, बाकी मामलों में तुम्हारी जहरीली जुबान को काठ क्यों मार जाता है  ? 


हम किसी हत्या के समर्थक नहीं हैं, किसी अपराध की पैरोकारी नहीं करते, लेकिन हम नफरत के समर्थक भी नहीं हैं, नफ़रतियों की जमात में,उनके झुंड में कतई शामिल नहीं हो सकते, चाहे इसका मतलब अकेले या अलग- थलग होना ही क्यों न हो  !  


  • -इन्द्रेश मैखुरी

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