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हाय री चाटुकारिता : जो शाह ने किसी और के लिए कहा, उसे अखबारों ने धामी की तारीफ बता कर चिपकाया !

 


हमारी अखबारों और मीडिया की हालत किसी से छुपी नहीं है. सत्ता की चरण वंदना करते-करते वे इस कदर चरण चुंबक हो चुके हैं कि दुनिया में कोई किसी को भी संबोधित करे उन्हें अपने सत्ताधारी पालनहारों, तारणहारों की तारीफ मालूम पड़ती है.


ऐसा ही कल ऋषिकेश में भी हुआ. ऋषिकेश में आये केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के भाषण का जो मजमून आज विभिन्न अखबारों में छपा है, उसका शीर्षक का लब्बोलुआब है कि गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि पुष्कर सिंह धामी, धर्म की ज्योति अखंड कर रहे हैं ! अखबारों और मीडिया द्वारा सत्ता की ऐसी चाटुकारिता से ही अखबारों के पाठक सिमटते जा रहे हैं. लेकिन जो बचे-खुचे हैं, वो ऐसे शीर्षक देख कर समझेंगे कि कह ही दिया होगा, मुख्यमंत्री के बारे में अमित शाह ने ऐसा ! तीन प्रमुख अखबारों के हैडिंग देखिये तो लगता है एक ही आदमी ने तीनों अखबारों के लिए हैडिंग बनाए और फिर सबको दे दिए कि यही छापना है और थोडा बहुत कॉमा, फुल स्टॉप के हेरफेर के साथ अखबारों ने पूरी फरमाबरदारी निभाई !







पर क्या वाकई गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के बारे में कहा कि वे धर्म रक्षक हैं ? कह भी सकते थे क्यूंकि उन्माद फैलाने को धर्म रक्षा कहा जाए तो भय्या धाकड़-हैंडसम को यह तमगा मिल ही सकता है. अभी हाल ही में अमेरिका के सेंटर फॉर स्टडी ऑफ़ आर्गेनाइज्ड हेट ने मुख्यमंत्री को भारत में सर्वाधिक हेट स्पीच देने वाला व्यक्ति करार दिया है. तो ऐसे में गृह मंत्री उन्हें धर्म रक्षक तमगा दे देते तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए था !


लेकिन यहां तो सवाल अखबारों से है कि जो तमगा गृह मंत्री ने मुख्यमंत्री को दिया नहीं, वो अखबारों ने खबर में गृह मंत्री के मुंह से मुख्यमंत्री को कैसे दिलवा दिया !





केंद्रीय गृह मंत्री ने अपना संबोधन शुरू करते हुए कहा – “मंच पर उपस्थित उत्तराखंड के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्रीमान पुष्कर सिंह धामी जी, जिन्होंने पूरे देश में देश भक्ति जागृत करना और धर्म की जोत को अखंड करने के लिए अहर्निश विचरण किया है, ऐसे आचार्य श्री गोविंद देव गिरी जी महाराज.... ”







 ऐसा लगता है कि इस वाक्य को बोलने में जो अर्द्धविराम यानि कॉमा है, उसको अखबार वालों ने खुद ही मिटा दिया या फिर सरकारी प्रेस विज्ञप्ति भेजने वालों ने गायब कर दिया और इस तरह से अखबारों को गृह मंत्री के मुंह से मुख्यमंत्री को धर्म रक्षक घोषित करवाने का अवसर प्राप्त हो गया ! एक-आध अखबार ने इसके आगे मुख्यमंत्री के धर्म रक्षा के कार्यों की सूची भी प्रकाशित कर डाली ! एक अखबार ने इसे धामी का कद बढ़ाने वाली घोषणा करार दिया ! इस अखबार ने धामी की तारीफ में शाह के मुंह से दो-तीन वाक्य और सुन डाले और फिर छाप भी डाले !






 अखबारनवीस इस बात पर भी मोहित हैं कि गृह मंत्री, मुख्यमंत्री को देख कर मुस्कुरा रहे हैं ! क्यूँ भाई आपको क्या लगता है कि अपने बैठाए प्यादे को देख कर वज़ीर मुंह फुलाए रहते क्या ! और चाटुकारिता के इस अतिउत्साह में अखबार वालों ने अमित शह के हवाले से यह भी लिख डाला कि धर्म प्रचार के लिए मुख्यमंत्री धामी पूरे देश में विचरण करते रहते हैं ! कब, कहां, कैसे ! क्या कोई मुख्यमंत्री धर्म प्रचारक हो कर देश भर में घूम सकता है ? सामान्य बोध तो कहता है-नहीं, पर चाटुकारिता की अतिश्योक्ति में सामान्य बोध यानि कॉमन सेंस का क्षरण होना तो तय ही है !


अभी कुछ ही अरसा हुआ है, जब तमाम मीडिया संस्थानों को एक हज़ार करोड़ रूपए के विज्ञापन बांटने का मामला चर्चा में रहा है ! इस एक भाषण के हवाले से जितना मक्खन पॉलिश अखबार वालों ने मुख्यमंत्री का कर दिया है तो ऐसे में तो उनमें से हर एक मुख्यमंत्री से हज़ार करोड़ की बख्शीश पाने का तलबगार हो गया है ! यह दीगर बात है कि विज्ञापन वे भले ही हज़ार करोड़ का पा जाएं, विश्वसनीयता और साख उनकी दो कौड़ी की नहीं रह गयी है !


-इन्द्रेश मैखुरी

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