डियर शाह जी,
आप थोड़ा दुखी होंगे कि आपके अपने उन रणबांकुरों को जेल भेजना पड़ा, जो कल दिल्ली में आपके "नारी शक्ति वंदन" के नारे को सड़क पर अमली जामा पहना रहे थे ! आपकी पार्टी ने नारा दिया- बेटी बचाओ और आपके ये रणबांकुरे प्रैक्टिकल करके दिखा रहे थे कि बेटी इनसे बचा कर दिखाओ !
हालांकि आपके इन रण बांकुरों को आम जनता शोहदा, लफंगा, गुंडा, लंपट समझती है पर ये स्वयं को धर्म रक्षक समझते हैं ! शोहदों, लफंगों, लंपट, गुंडों को भी अपने बारे में उच्च विचार रखने का अधिकार है ही !
यह दीगर बात है कि ये सारे तथाकथित धर्म रक्षक 2014 के बाद ही कुकुरमुत्तों की तरह चौक- चौक पर , गली- गली में उग आए हैं, सड़कों और एक्सप्रेस वे के हर गड्ढे में दर्जन भर ऐसे तथाकथित धर्म रक्षक हैं ! कहते हैं कि बारह साल में तो घूरे के दिन भी फिरते हैं, लेकिन हर पत्थर के नीचे ऐसे ही तथाकथित धर्म रक्षक होने के बावजूद ये खुद ही वैशाखनंदन गान करते रहते हैं कि धर्म खतरे में है ! इनकी संख्या आपकी छत्रछाया में अमीबा की तरह बढ़ती जाती है और उतना ही इनका क्रंदन भी कि धर्म खतरे में है ! इधर यह दावा है कि धर्म शिरोमणि, धार्मिकों के हृदय सम्राट 56 इंची नॉन बायोलॉजिकल महाप्रभु से देश विश्वगुरु हुआ जाता है और उधर यह क्रंदन भी पूरे ज़ोरों पर है कि धर्म खतरे में है ! दोनों एक साथ कैसे संभव है, आप ही जानें ! कहावत है कि "खग जाने खग की भाषा" ! कहावत में ख की जगह ठ भी हो जाए तो भी कोई उज्र नहीं !
हालांकि यह भी लगता है कि जैसी इनकी करतूतें हैं, उससे धर्म तो क्या मनुष्यता भी खतरे में मालूम पड़ती हैं !
पर मेरी जिज्ञासा,मेरा कौतूहल कुछ और है शाह जी ! जानना यह है कि दिल्ली पुलिस ने नारी शक्ति वंदन और बेटी बचाओ का क्रंदन उत्पन्न करने में कौन सी कमी कर दी थी कि आपको अपने इन रणबांकुरों को मोर्चे पर लगाना पड़ा ? दिल्ली पुलिस ने पिछले दो दिन से दिल्ली की सड़कों पर ऐसी कौन सी कसर छोड़ दी थी कि इन रणबांकुरों को मैदान में उतारना पड़ा ? या 56 इंची नॉन बायोलॉजिकल जुमलेश्वर महाप्रभु का जुमला उधार ले कर कहें तो कह सकते हैं कि दिल्ली पुलिस की तपस्या में क्या कमी रह गयी थी, जो इन रणबांकुरों को अपना रणकौशल दिखाना पड़ा !
मुमकिन है कि इनके हुनर को जंक ने लग जाए इसलिए इन्हें मोर्चे पर उतारा होगा आपने ! ये बेचारे इस हुनर के अलावा और कुछ तो जानते नहीं ! समय- समय पर अगर ये हुनर आजमाते नज़र न आएं तो बेचारे अवसाद में आकर कुछ कर ही न बैठें ! ये इस धराधाम पर न रहें तो मनुष्यता की अमानुष श्रेणी तो विलुप्त ही हो जायेगी !
बहरहाल यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते और कन्या जिमाने का प्रैक्टिकल तो आपकी पुलिस और आपके रणबांकुरे बखूबी कर रहे हैं और इस पूजन पर 56 इंची नॉन बायोलॉजिकल जुमलेश्वर महाप्रभु नामक देवता रमण कर ही लेंगे !
-इन्द्रेश मैखुरी


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