कल के अमर उजाला में खबर छपी कि देहरादून में एक बार के निर्धारित समय सीमा के बाद खुले मिलने पर जब एसपी सिटी प्रमोद कुमार के नेतृत्व में पुलिस बल, उस बार को बंद करवाने पहुंचा तो वहां एक आईजी साहब मिले, जिन्होंने पुलिस पर रौब गालिब किया और पुलिस बल को वहां से जाने को कहा. इस पर एसपी सिटी प्रमोद कुमार ने देहरादून के एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल को सूचना दी और फिर एसएसपी ने स्वयं आकर बार बंद करवाया.
एसएसपी की तारीफ में कसीदे पढ़ने की गरज से खबरनवीस ने लिखा -" आईजी साहब के इस दखल की जानकारी एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल को मिली तो उनके गुस्से का ठिकाना न रहा. वह खुद बार पहुंचे और हाथ में डंडा थाम लिया... " ये पंक्तियां गज़ब चारण- भाट नुमा पत्रकारिता का उदाहरण हैं. राजकीय खर्च पर चलने- पलने वाली पोर्टल नुमा पत्रकारिता में तो इस तरह मंत्रियों- अफसरों की ऐसी मस्का- पॉलिश आम है पर अमर उजाला जैसे अखबार में यह देखना एक तरह से पत्रकारिता के क्षरण को देखना ही था. खबर लिखने वाले का मंतव्य तो एसएसपी साहब की नज़रों में आना हो भी सकता है पर डेस्क वाले ने भी खबर को खबर की तरह दुरुस्त करने के बजाय एसएसपी साहेब का भौकाल बनाने के स्पेस के तौर पर उपयोग होने दिया, यह हैरत की बात है !
हालांकि जिन एसएसपी साहेब की तारीफ में इतने कसीदे पढ़े गए हैं, उन्होंने निर्धारित समय सीमा के बाद खुले हुए, इस बार के खिलाफ क्या कार्रवाई की, यह खबर में नदारद है ! क्यों नहीं की,यह कसीदे पढ़ने वाला कैसे पूछ सकता था भला !
बहरहाल इस खबर से मामला सनसनीखेज हो गया. दिन भर इस प्रकरण में संलिप्त आईजी साहब के नाम का कयास और लानत-मलामत का दौर चला. बार का नाम बताया गया- रोमियो लेन बार. फिर इस रोमियो लेन बार के बारे में भी किस्से - कहानियों का दौर चल पड़ा.
शाम तक पुलिस मुख्यालय ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करके बताया कि आईजी (गढ़वाल) राजीव स्वरूप और एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल से उक्त मामले में 24 घंटे में रिपोर्ट तलब की गयी है. पुलिस मुख्यालय की इस प्रेस विज्ञप्ति से स्पष्ट हो गया कि बार में जिन आईजी साहब के होने का चर्चा है वो राजीव स्वरूप ही हैं !
रात गहराने के साथ एसपी सिटी प्रमोद कुमार का एक वीडियो जारी हुआ.
इसमें एसपी सिटी इस बात से साफ इंकार कर रहे हैं कि बार में उनका "किसी" आईजी से सामना हुआ. एसपी सिटी तो यह भी कह रहे हैं कि वे तो "अमुक" बार में गए ही नहीं ! एसपी सिटी महोदय, इतनी रक्षात्मक मुद्रा में हैं कि वे बार का नाम लेने से भी बचते देखे जा सकते हैं और उस बार को "अमुक बार" के नाम से संबोधित करते हैं !
"आज तक" के पोर्टल पर आईजी (गढ़वाल) राजीव स्वरूप का बयान प्रकाशित हुआ है. उक्त बयान में वे कहते हैं कि उनके बारे में गलत जानकारी फैलाई जा रही है.
लेकिन "आज तक" के पोर्टल पर छपे आईजी (गढ़वाल) राजीव स्वरूप के बयान और एसपी सिटी प्रमोद कुमार के वीडियो बयान को एक साथ रख दें तो कहानी में झोल साफ नज़र आता है.
एसपी सिटी कहते हैं कि बार 12.20 या साढ़े बारह बजे के आसपास बंद हो गया था. संबंधित उच्च अधिकारी वहां अपनी पत्नी के साथ डिनर करने आए हुए थे. जब वो नीचे उतरे, उनके द्वारा जो पुलिस के कर्मचारी थे, उनसे जानकारी की गयी कि आप लोग विभिन्न थाना क्षेत्रों से यहां किस उद्देश्य के लिए आए हुए हैं तो उनके द्वारा बताया गया कि जो रुटीन की चेकिंग हमारे द्वारा सटरडे- संडे की नाइट को होती है, ऑपरेशन नाइट स्ट्राइक के संबंध में, उसी के संबंध में वो टीमें बना कर राजपुर के विभिन्न क्षेत्रों में थे.
एसपी सिटी के वीडियो बयान से दो बातें साफ है कि बार 12.20 या साढ़े 12 बजे बंद हुआ और आईजी उस बार में थे, जिसे एसपी सिटी "अमुक बार" कहते हैं !
लेकिन आज तक" के पोर्टल पर आईजी (गढ़वाल) राजीव स्वरूप का बयान है कि " मैं अपने परिवार के साथ उस क्षेत्र से गुजर रहा था. मैंने वहां एक साथ 7 थानों की पुलिस और भारी फोर्स तैनात होने पर नाराजगी जताई थी कि इतने स्टाफ की वहां क्या जरूरत है ? "
तो एसपी सिटी के अनुसार "उच्च अधिकारी" "अमुक बार" में पत्नी के साथ डिनर करने आए थे, जबकि आईजी (गढ़वाल) के अनुसार वे परिवार के साथ उस क्षेत्र से गुजर रहे थे !
इन दोनों बयानों में जो विरोधाभास है, वही बताता है कि मामले को समेटने के लिए जो लीपापोती की कोशिश की जा रही है, उससे रायता और फैलेगा !
वैसे इस मामले को हल करने का सबसे आसान तरीका तो यह है कि रोमियो लेन नाम के "अमुक बार" की सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक कर दी जाए तो मामले की असल तस्वीर खुद-ब- खुद सामने आ जाएगी.
जरूरत यह है कि कानून का उल्लंघन करने वाला चाहे आईजी हो या किसी ताकतवर का बार, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई हो.
-इन्द्रेश मैखुरी



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