भारत में जब तक किसी बड़े घटनाक्रम में किसी कमजोर आदमी की गर्दन न दबोची जाए तब तक लगता नहीं कि पुलिस ने अपना काम ठीक से पूरा किया.
दिल्ली में तीन दिन पहले हुए मालवीय नगर अग्निकांड में भी दिल्ली पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए, इस सारे कांड का ठीकरा, सबसे कमजोर कड़ी पर फोड़ दिया है. दिल्ली पुलिस ने फ़्लरिश स्टे में लगी आग, जिसमें 21 लोगों की मौत हो गई, के मामले में इस होटल के शेफ केशव नेगी को गिरफ्तार कर लिया है और अब सारा ठीकरा केशव नेगी के सिर फोड़ने की कोशिश की जा रही.
बकौल पुलिस केशव नेगी ने बयान दिया है कि उसने जैसे ही इलेक्ट्रिक स्टोव ऑन किया, उसमें विस्फोट हो गया और आग लग गयी. चूंकि आग इलेक्ट्रिक स्टोव से लगी तो केशव नेगी ने मेन पॉवर सप्लाई का स्विच बंद कर दिया. पुलिस को आशंका है कि इससे बिजली से संचालित दरवाजे नहीं खुले होंगे. यह आशंका वाजिब भी हो सकती है, लेकिन यदि आग बिजली से चलने वाले किसी उपकरण में विस्फोट से लगी हो तो आग फैलने से रोकने के मामले में आदमी के दिमाग में जो पहली बात आएगी, वो तो यही होगी कि बिजली सप्लाई बंद कर दी जाए. केशव नेगी ने यही किया और इसके लिए वो गुनहगार ठहराए जा रहे हैं.
मूल सवाल अभी भी अपनी जगह है कि बिना अग्निशमन विभाग की अनुमति के यह होटल चल कैसे रहा था ? होटल को छह कमरों की अनुमति थी तो उसमें 28 कमरे कैसे संचालित हो रहे थे ? अग्नि सुरक्षा और वेंटिलेशन की सुरक्षा में गंभीर खामियां थी. इस होटल में चूंकि विदेशी इलाज कराने वाले लोग आ कर रहते थे और यह उनके लिए बेड एंड ब्रेकफास्ट व्यवस्था के तहत संचालित होता था तो ऐसा मुमकिन ही नहीं था कि पुलिस की इस पर नियमित नज़र नहीं रहती हो. द प्रिंट में छपी रिपोर्ट तो बता रही है कि इसका मालिक इसी नाम से 200 मीटर की दूरी पर एक और होटल चला रहा था, जिसे इस होटल में आग लगने पर खाली करवाया गया.
इस तरह देखें तो उक्त होटल के मालिक ने खूब गड़बड़ियां की और ये प्रशासन और पुलिस के साथ बिना मिलीभगत के संभव ही नहीं है. जांच तो इस एंगल से होनी चाहिए. लेकिन इन सारे सवालों को एक शेफ केशव नेगी को बलि का बकरा बना कर ढकने की कोशिश की जा रही है. केशव नेगी को बलि का बकरा बनाने की यह कोशिश कतई स्वीकार्य नहीं है.
-इन्द्रेश मैखुरी


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