उच्चतम न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई 16 मार्च 2026 को राज्यसभा से रिटायर हो गए. उनके कार्यकाल पूरा करने पर उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सी.पी.राधाकृष्णन ने उनका विदाई वक्तव्य पढ़ते हुए कहा कि एक प्रख्यात न्यायविद के तौर पर वे अभूतपूर्व कानूनी विद्वता और अनुभव सदन की कार्रवाईयों में लेकर आए, राज्यसभा में उनके हस्तक्षेप ने उनकी विधाई कार्यों और सार्वजनिक हित की गहरी समझ को प्रतिबिंबित किया. उनकी अनुपस्थिति से सदन उनके समझदारी भरे सुझावों, बुद्धिमत्ता पूर्ण हस्तक्षेपों और गरिमा की कमी महसूस करेगा, जो वे राज्यसभा की चर्चाओं में लेकर आये. राज्यसभा के सभापति ने कहा कि उनकी कामना है कि वे (गोगोई) विभिन्न भूमिकाओं में राष्ट्र को अपना योगदान उसी समर्पण, सत्यनिष्ठा और सेवा की भावना से जारी रखेंगे जो कि उन्होंने अपने शानदार सेवाकाल के दौरान प्रदर्शित की है.
राज्यसभा के सभापति के इस भाषण को सुन कर लगता है कि रंजन गोगोई ने राज्यसभा में न जाने क्या अभूतपूर्व कर दिया, जिसके लिए एक मिनट अट्ठाईस सेकंड में इतनी तारीफों की वर्षा की गयी कि गोगोई साहब इस तारीफ में पूरे ही तरबतर हो जाएं !
पर क्या हकीकत में रंजन गोगोई ने राज्यसभा में कोई उल्लेखनीय काम किया है ? राज्यसभा की आधिकारिक वेबसाइट देखिये तो वहां गोगोई साहब के नाम के आगे निल बट्टा सन्नाटा ही नज़र आता है.
राज्यसभा की वेबसाइट बताती है कि छह साल में रंजन गोगोई द्वारा पूछे गए प्रश्नों की संख्या है- शून्य. जब सत्ता की कृपा से रिटायरमेंट के बाद राज्यसभा पहुंच गए तो लगता है सारे सवाल खुद ही हल हो कर शून्य हो गए !
इसी तरह विधेयक, आश्वासन, वाले खाने में भी बड़ा- बड़ा शून्य ही दर्ज है.
एक कमेटी के वे सदस्य थे और छह साल में कुल जमा एक बहस में उन्होंने हिस्सा लिया.
राज्यसभा में उनकी उपस्थिति लगभग 53 प्रतिशत दर्ज की गयी यानि वे आधे समय ही राज्यसभा गए, बाकी समय उन्होंने वहां जाने की जहमत भी नहीं उठाई. इस ना जाने पर भी वे करीब सवा लाख रुपए महीने की तनख्वाह पाते रहे होंगे, इसके अलावा अन्य कई प्रकार के भत्ते अलग से और रिटायर होने पर पेंशन भी पाएंगे.
जिस समय अपने पूर्ववर्ती मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय के दो अन्य न्यायाधीशों के साथ मिल कर रंजन गोगोई ने प्रेस कांफ्रेंस की थी, उस समय लगा था कि न्यायपालिका में युगांतकारी बदलाव गोगोई साहब लाएंगे. लेकिन उनके मुख्य न्यायाधीश होने से लेकर राज्यसभा तक की सारी यात्रा ध्वंस और क्षरण की ही यात्रा है.
-इन्द्रेश मैखुरी

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