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कर्णप्रयाग के अस्पताल पर ताला ही लगा देना है क्या सरकार ?

 








अभी कुछ ही दिन बीते हैं जब प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत कह रहे थे कि उनकी सरकार ने ऐसा बंदोबस्त कर दिया है कि सब अस्पतालों में डाक्टर होंगे.


जिस समय मंत्री महोदय यह बयान दे रहे थे, लगभग उसी के आसपास कर्णप्रयाग के सरकारी अस्पताल, जिसे सरकारी भाषा में उपजिला चिकित्सालय कहा जाता है, वहां नियुक्त डेंटल सर्जन डॉ.हरीश थपलियाल का प्रमोशन के आधार पर तबादला कर दिया गया. यह गौरतलब है कि डॉ. थपलियाल की ड्यूटि कोरोना काल बीत जाने के बाद भी लंबे अरसे तक कोरोना के काम पर ही लगाए रखी गयी और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के विरोध, विशेषतः पूर्व जिला पंचायत सदस्य बीरेन्द्र मिंगवाल के आवाज़ उठाने के बाद ही वे वापस अस्पताल में अपने निर्धारित कार्य पर भेजे गए. इस बात को महीना भी नहीं बीता था कि उनका तबादला हो गया. यह एक अच्छे डाक्टर की सेवाओं से जनता को महरूम रखने के सरकारी प्रयासों की दास्तान है.


इस बात के हफ्ता भर बीतते-न-बीतते कल खबर आई कि कर्णप्रयाग अस्पताल में लंबे अरसे से तैनात सर्जन डॉ.राजीव शर्मा का तबादला ऋषिकेश कर दिया गया है. कर्णप्रयाग का यह सरकारी अस्पताल चल ही इसलिए पा रहा है कि डॉ.राजीव शर्मा लंबे अरसे से यहां सेवारत हैं.







यहां यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि सवाल किसी भी डाक्टर के जाने का नहीं है, समस्या यह है कि यहां से डाक्टर जा तो रहे हैं, परंतु उनके स्थान पर नयी तैनाती शून्य है. 2007 से कर्णप्रयाग के सरकारी चिकित्सालय में बाल रोग विशेषज्ञ नहीं हैं, हड्डी रोग विशेषज्ञ का लगभग छह बरस पहले तबादला हुआ और फिर उनके बदले किसी अन्य की नियुक्ति नहीं हुई. अल्ट्रासाउंड के लिए भी स्थानीय लोगों को सत्तर किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करनी पड़ रही है. कर्णप्रयाग में प्रदेश सरकार ने कैसा उपजिला चिकित्सालय बनाया है, जिसमें न फिजीशियन हैं, न बाल रोग विशेषज्ञ, न हड्डी रोग विशेषज्ञ, न पैथोलॉजिस्ट !


जिस आदेश में कर्णप्रयाग से सर्जन डॉ.राजीव शर्मा का तबादला किया गया है, उसी आदेश में अल्मोड़ा जिला चिकित्सालय और गोपेश्वर जिला चिकित्सालय से स्थानांतरण के फलस्वरूप रिक्त हुए प्रभारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी और प्रभारी अपर मुख्य चिकित्साधिकारी के पदों पर प्रतिस्थानी नियुक्त करने का उल्लेख है. सवाल यह है कि जिले में चिकित्सा के प्रशासनिक पदों पर तो प्रतिस्थानी का इंतजाम किया जा रहा है और उपचार करने वालों का प्रतिस्थानी क्यूं नहीं नियुक्त किया जा रहा है ?


बहरहाल कर्णप्रयाग के उप जिला चिकित्सालय से डॉ.राजीव शर्मा का  तबादला किए जाने के बाद तो इस अस्पताल में केवल ताला लगाना ही शेष है. क्या ऐसा ही करना चाहती है उत्तराखंड की भाजपा सरकार ?


-इन्द्रेश मैखुरी

 

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