4 जुलाई को उत्तराखंड में भाजपा की सरकार से बड़े धूमधाम से समारोह मनाया कि मुख्यमंत्री के तौर पर पुष्कर सिंह धामी ने एनडी तिवारी की बराबरी कर ली. धामी का फूला ना समाना तो स्वाभाविक था ही पर मीडिया का अच्छा ख़ासा हिस्सा भी बिलकुल किलक रहा था, किलकारियां भर रहा था ! वे बिछे जा रहे थे कि देखो धामी ने क्या तीर मारा- पांच साल पूरे कर लिए गद्दी पर बैठे- बैठे !
अभी कुछ दिन ही बीते हैं, जब दिल्ली में भी इसी तरह की किलकारियां भरी जा रही थी कि देखो नॉनबायोलॉजिकल, 56 इंची महाप्रभु ने कुर्सी पर बैठ-बैठ कर नेहरु का रिकॉर्ड तोड़ दिया !
तो तस्वीर यह है कि दिल्ली में बैठे वाले और देहरादून में उनके रिमोट कंट्रोल से चलने वाले बस दिन गिन रहे हैं ! क्रिकेट के मैदान पर कमेंटेटरों और स्कोर कीपरों को बल्लेबाजों के रनों और गेंदबाजों के विकेटों का रिकॉर्ड रखते सूना था पर दिल्ली-देहरादून में यह नमूनेपंथी पहली बार देखने में आई ! जनता दिन-प्रतिदिन जिंदगी में बढ़ती मुसीबतों को गिन रही है और दिल्ली के नॉनबायोलॉजिकल, 56 इंची महाप्रभु और देहरादून में उनके रिमोट कंट्रोल से चलने वाला उनका छोटू, जो विज्ञापनों के जरिये खुद को धाकड़, हैंडसम, धुरंधर और जाने क्या-क्या कहलवाते रहते हैं, दोनों भाई मिलकर कुर्सी पर बैठने के दिन गिन रहे हैं !
देहरादून में जो बता रहे हैं कि उन्होंने कुर्सी पर बैठने के पांच साल पूरे करने का रिकॉर्ड बना लिया है तो इससे जनता का क्या सरोकार ! उनसे पहले भाजपा के ही जो मुख्यमंत्री पांच साल नहीं पूरा कर पाए तो उन्हें जनता ने तो पांच साल पूरा करने से पहले कुर्सी से नहीं उतारा ! वे तो भाजपा के भीतर की ही अंदरूनी खींचातान और गुटबाजी की वजह से समय से पहले ही दिल्ली वालों द्वारा सत्ता से विदा कर दिए गए ! खंडूड़ी-निशंक, त्रिवेंद्र सिंह रावत-तीरथ सिंह रावत यदि समय से पहले ही कुर्सी से उतार दिए गए तो यह भाजपाई अंदरूनी खींचातान और गुटबाजी का ही नतीजा था.
धामी ने जब अपने कुर्सी पर बैठने के चार साल पूरे होने का जश्न भी मनाया तो तब भी उन्होंने नारा दिया- चार साल बेमिसाल ! भाई उससे पहले के जो जो चार साल और तीन महीने थे, वे भी तो भाजपा का शासन था. यह अंदरूनी झगड़े की ही तो खुली अभिव्यक्ति थी कि अपने पूर्ववर्तियों के चार साल, तीन महीनों को धामी जी ने बेमिसाल की कैटेगरी से बाहर कर दिया !
अब जब पुष्कर सिंह धामी यह बता रहे हैं कि उन्होंने कुर्सी पर बैठे-बैठे पांच साल पूरे कर लिए तो ये भी एक तरह से भाजपाई गुटबाजी का प्रदर्शन ही है. पुष्कर सिंह धामी एंड कंपनी प्रकरांतर से त्रिवेंद्र सिंह-तीरथ सिंह को चिढ़ा रहे हैं कि देखो तुम तो चार साल और तीन महीने में निपटा दिए गए और मैं देखो डेढ़ कार्यकाल में पांच साल पूरे कर चुका हूं ! धामी एंड कंपनी, इन सबों को यह भी बता रही है कि हाईकमान के दुलारे, आंखों के तारे, हिया के प्यारे तो भैया स्वघोषित हैंडसम-धाकड़- धुरंधर ही हैं, इसीलिए वे कुर्सी से हटाए जाने की तमाम चर्चाओं और अफवाहों के बावजूद कुर्सी पर जमे हुए हैं !
कुर्सी पर जमे रहने के अलावा राज्य के लिए तो कोई ठोस उपलब्धि नहीं है. इन पांच सालों में उत्तराखंड में अपराधों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है, भ्रष्टाचार बढ़ा है, गांवों के खाली होने और स्कूलों के बंद होने का सिलसिला बदस्तूर जारी है, पहाड़ में जंगली जानवरों का शिकार होने और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के अभाव के चलते दम तोड़ने का सिलसिला भी थम नहीं रहा है, सांप्रदायिक घृणा की घटनाओं में अप्रत्याशित वृद्धि हुई और स्वयं पुष्कर सिंह धामी को 2025 में देश में सर्वाधिक नफरत भरे भाषण देने वाले व्यक्ति का खिताब अमेरिका से हासिल हुआ, अंकिता भंडारी केस हो, पेपर लीक या उद्यान विभाग घोटाला- सीबीआई आगे कदम बढ़ाने को राजी नहीं है, जाहिर सी बात है कि डबल इंजन की सहमति से सरकारी तोते के कदम रोके हुए होगी !
इन पंक्तियों के लिखे जाने तक खबर आई कि राज्यपाल पद पर आसीन लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) गुरमीत सिंह ने भी सर्वाधिक दिन कुर्सी पर बैठने का रिकॉर्ड कायम किया है. फ़ॉर्मूला उन पर भी वही लागू होता है- दिल्ली कृपा ! बाकी वे चाहें तो मेजर जनरल जी.डी बख्शी के साथ अपनी ख़ुशी सेलिब्रेट कर सकते हैं !
-इन्द्रेश मैखुरी
(वीडियो इसी मसले पर कुछ ही दिन पहले डिजिटल चैनल- न्यूज़ ट्रायल- की चर्चा का है)


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