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चुनाव आयोग से वामपंथी पार्टियों ने कहा : वागेश्वर की डीएम को निष्पक्षता का पाठ पढ़ाएँ या उन्हें संवदनशील जिम्मेदारियों से हटाएँ !

 







प्रति,

1.     श्रीमान मुख्य निर्वाचन आयुक्त महोदय,

भारत निर्वाचन आयोग, नयी दिल्ली.

 

   2. श्रीमान मुख्य निर्वाचन अधिकारी महोदय,

       उत्तराखंड, देहरादून.

 

 

महोदय,

        05 सितंबर 2023 को उत्तराखंड के 47 बागेश्वर विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव होना है. आम तौर पर चुनाव कार्य सम्पन्न कराने में लगे अधिकारियों एवं कर्मचारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे निर्वाचन के काम को स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से सम्पन्न कराएंगे.


लेकिन यह बेहद अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि बागेश्वर जिले की जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी- श्रीमती अनुराधा पाल जी एवं उनके अधीनस्थों का व्यवहार एवं कार्यप्रणाली उक्त पैमाने पर खरी उतरती नहीं दिखाई दी.


महोदय, तीन वामपंथी पार्टियों- भाकपा, माकपा, भाकपा(माले) की ओर से 29 अगस्त 2023 को उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी महोदय को पत्र भेज कर सूचित किया गया था कि हम 01 सितंबर 2023 को बागेश्वर में एक प्रेस वार्ता को संबोधित करेंगे. हमारे पत्र के क्रम में उत्तराखंड के सहायक निर्वाचन अधिकारी श्री मस्तू दास जी ने दिनांक 30 अगस्त 2023 को पत्रांक संख्या 1543 / XXV- 10 / 2023 के द्वारा जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, बागेश्वर से कहा कि वे तीन वामपंथी पार्टियों के नेताओं की दिनांक 01 सितंबर 2023 को बागेश्वर में प्रेस कॉन्फ्रेंस की अनुमति के संबंध में नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही करने हेतु संबंधित को निर्देशित करने का कष्ट करें.









लेकिन बागेश्वर में प्रेस वार्ता की अनुमति मांगने की प्रक्रिया में हमें ऐसा प्रतीत हुआ जैसे कि बागेश्वर की जिलाधिकारी और उपजिलाधिकारी, बागेश्वर को मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तराखंड के कार्यालय से भेजे हुए पत्र की कोई परवाह ही नहीं थी.


उपजिलाधिकारी, बागेश्वर जो कि 47 बागेश्वर विधानसभा क्षेत्र के रिटर्निंग अफसर भी हैं, उन्होंने प्रेस वार्ता की अनुमति के लिए पहले आनाकानी की और फिर शर्त लगा दी कि अनुमति तभी मिलेगी, जब हम लिख कर देंगे कि हम प्रेस वार्ता में क्या बोलेंगे. यह भी शर्त लगा दी गयी कि प्रेस वार्ता में जो हमें बोलना है, वो कागज़ पर हाथ से लिख कर देना होगा.


महोदय, उत्तराखंड राज्य में 2002 से चुनाव हो रहे हैं, लेकिन बीते 20-21 वर्षों में प्रेस वार्ता करने के लिए ऐसी शर्तें पहले कहीं देखने-सुनने में नहीं आई. प्रेस वार्ता कमरे के भीतर होने वाला कार्यक्रम है तो इससे किसी तरह के ट्रैफिक या कानून व्यवस्था में विघ्न की भी कोई संभावना नहीं होती. लेकिन मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तराखंड के कार्यालय से पत्र भेजे जाने के बावजूद इस तरह की शर्तें थोपे जाना समझ से परे था.


इस संदर्भ में जब हमने जिलाधिकारी, बागेश्वर से बात की तो उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि हमारी पार्टियां चुनाव नहीं लड़ रही हैं तो हमें प्रेस वार्ता की अनुमति क्यूँ मिलनी चाहिए !









महोदय, आदर्श चुनाव आचार संहिता से लेकर अन्य किसी भी कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि जो चुनाव नहीं लड़ रहा, उसके बोलने, वैचारिक अभिव्यक्ति के सारे अधिकार बंधक हो जाते हैं ! लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि बागेश्वर की जिला निर्वाचन अधिकारी/जिलाधिकारी श्रीमती अनुराधा पाल एवं उपजिलाधिकारी / रिटर्निंग अधिकारी- 47 बागेश्वर विधानसभा क्षेत्र ने सत्तापक्ष के दबाव अथवा झुकाव में नियम-कायदों की सीमा को पार कर लिया है. इसलिए वे सत्तापक्ष के इतर पार्टियों को प्रेस वार्ता जैसी सामान्य गतिविधि की अनुमति देने में भी हर संभव बाधा उत्पन्न करने की कोशिश करते रहे. बागेश्वर के पत्रकारों को भी उनसे काफी शिकायतें हैं.


उक्त सभी बातों के आलोक में आपसे निवेदन है कि बागेश्वर की जिलाधिकारी एवं उपजिलाधिकारी को कठोर निर्देश दिये जाएँ कि वे स्वतंत्र,निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया सम्पन्न करवाएँ. भारत निर्वाचन आयोग के पर्यवेक्षक एवं उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी का कार्यालय यह सुनिश्चित करे कि कल 05 सितंबर 2023 को होने वाले चुनाव पर उक्त अफसरों के झुकाव और दबाव कोई असर न पड़े.


यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि श्रीमती अनुराधा पाल जैसे अफसरों को या तो स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से चुनाव प्रक्रिया संचालन करने का पाठ सिखाया जाये अन्यथा चुनाव जैसा संवेदनशील कार्य उनकी निगरानी में न कराया जाये.


सधन्यवाद,


राजेंद्र सिंह नेगी,                                        

राज्य सचिव, माकपा, 

  उत्तराखंड.                         



  इन्द्रेश मैखुरी,

राज्य सचिव,भाकपा(माले),

उत्तराखंड.                                             

 

दिनांक- 04 सितंबर 2023

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