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जाते थे जापान, पहुँच गए चीन, याने, याने,याने ...............

 







यह एक पुराना हिन्दी फिल्मी गीत है- जाते थे जापान, पहुँच गए चीन, याने, याने,याने...... कुछ ऐसी ही अवस्था भारत सरकार और उसके मुखिया, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की है.


बीते दिनों, बुद्ध पुर्णिमा के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, नेपाल स्थित महात्मा बुद्ध के महापरिनिर्वाण स्थल- लुंबिनी गए. जिस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लुंबिनी गए,उसी दिन लुंबिनी से 19 किलोमीटर दूर भैराहावा में, नेपाल के दूसरे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन हुआ, जिसका नाम-गौतम बुद्ध अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा रखा गया है. लेकिन नरेंद्र मोदी इस हवाई अड्डे पर नहीं उतरे, बल्कि लुंबिनी में बनाए गए हेलीपैड पर उतरे. इसका जो कारण प्रचारित किया गया, वो था कि उक्त हवाई अड्डे के निर्माण चूंकि चीनी कंपनी द्वारा किया गया, इसलिए कूटनीतिक संदेश देने के लिहाज से नरेंद्र मोदी ने ऐसा किया.


इससे लगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन को वो लाल-लाल आँखें दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, जिनकी बात वो प्रधानमंत्री बनने से पहले किया करते थे.


लेकिन प्रधानमंत्री के नेपाल से वापस लौटते ही जो दूसरी खबर आई,उसने फिर सिद्ध कर दिया कि नेपाल में प्रधानमंत्री ने जो किया, वो चीन के ऐप प्रतिबंधित करने जैसा ही स्टंट था.


खबर यूं है कि भारतीय रेलवे को वंदे भारत एक्स्प्रेस ट्रेनों के लिए पहियों की आवश्यकता है. इन ट्रेनों के 39000 पहियों के निर्माण का ठेका एक चीन की कंपनी को मिला है. खबरों के अनुसार, यह ठेका चीनी कंपनी को भारतीय रेल मंत्रालय द्वारा 02 मई को दिया गया. चीनी कंपनी टीज़ेड हाँगकाँग इंटरनेशनल लिमिटेड को मिला यह टेंडर 170 करोड़ रुपये का है.


जब 02 मई को चीनी कंपनी को रेल मंत्रालय द्वारा टेंडर आवंटित किया जा चुका था तो 16 मई को नेपाल में एक अन्य चीनी कंपनी द्वारा निर्मित हवाई अड्डे पर न उतरना तो स्टंट ही कहा जाएगा.  


चीन से जुड़ी तीसरी खबर यह है कि पूर्वी लद्दाख में  पैंगोंग झील के सँकरे क्षेत्र  में चीन दूसरा पुल बना रहा है. इससे पहले भी वहाँ पर चीन ने एक पुल का निर्माण किया, जो 2021 के अंत में बनना शुरू हुआ और पिछले महीने बन कर पूरा हो गया. पहले वाला पुल जहां केवल हल्के वाहनों और सैनिकों को ला सकता था, नया पुल उससे कहीं बड़ा है और बेहद तेजी से दोनों तरफ से बनाया जा रहा है. यह भारी बख्तरबंद वाहनों को भी लाने में उपयोगी होगा.


               साभार : https://twitter.com/detresfa_/status/1526773196057636866/photo/1








सीमा पर चीन की गतिविधियों को देख कर लगता है कि वो तो अपनी सैन्य तैयारी निरंतर मजबूत कर रहा है और नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री बनने के बाद वे लाल आँखें, कहीं खो बैठे हैं, जो प्रधानमंत्री बनने से पहले वो चीन को दिखाने की  बात करते थे.


देश का सारा पराक्रम इस वक्त मस्जिद खोदने पर लग रहा है, सीमाओं का क्या है, वो तो चीन खोद ही रहा है !


-इन्द्रेश मैखुरी  

 

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