cover

उच्च शिक्षा : उत्तराखंड के युवाओं की नियुक्ति की राह में रोड़ा क्यूं ?

 








प्रति,

1.    1. श्रीमान मुख्यमंत्री महोदय

       उत्तराखंड सरकार

       देहरादून.

 

2.    2. श्रीमान उच्च शिक्षा मंत्री महोदय,

        उत्तराखंड सरकार, देहरादून.

 

3.    3. श्रीमान अध्यक्ष / सचिव

        उत्तराखंड लोकसेवा आयोग

                हरिद्वार.

 

 

 

महोदय,


       उत्तराखंड के विभिन्न राजकीय महाविद्यालयों में सहायक आचार्य (असिस्टेंट प्रोफेसर) के  455 पदों पर नियुक्ति हेतु उत्तराखंड लोकसेवा आयोग, हरिद्वार द्वारा 04 दिसंबर 2021 को विज्ञप्ति जारी की गयी है.


महोदय, लंबे समय बाद प्रकाशित इस विज्ञप्ति से उत्तराखंड में उच्च शिक्षा में शिक्षण के आकांक्षी, अर्ह अभ्यर्थियों को प्रसन्न होना चाहिए था. लेकिन नियुक्ति का जो तरीका उक्त विज्ञप्ति में घोषित किया गया है, उससे उत्तराखंड के अधिकांश अभ्यर्थियों में निराशा व्याप्त है. उक्त विज्ञप्ति में नियुक्ति की शर्तों से अभ्यर्थी यह महसूस करते हैं कि उक्त विज्ञप्ति उन्हें प्रतियोगिता में शामिल होने से वंचित करने के लिए निकाली गयी है.


महोदय, विज्ञप्ति में कहा गया है कि “अभ्यर्थियों की छंटनी API (Academic Performance Indicators) स्कोर के आधार पर की जाएगी.”








 विज्ञप्ति में नियुक्ति की इस शर्त से उत्तराखंड के अभ्यर्थी यह महसूस करते हैं कि उक्त विज्ञप्ति उन्हें प्रतियोगिता में शामिल करने के लिए नहीं वरन वंचित करने के लिए निकाली गयी है.


महोदय, पूरे देश में जहां भी असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर नियुक्ति हो रही है, वहां लिखित परीक्षा और साक्षात्कार चयन का आधार है. 2019 में छत्तीसगढ़, 2020 में राजस्थान और उत्तर प्रदेश में सीधी भर्ती, लिखित परीक्षा के आधार पर हुई हैं. उत्तराखंड में 2017 में हुई असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती स्क्रीनिंग और साक्षात्कार के जरिये हुए तो अब की बार API और साक्षात्कार की प्रक्रिया अपनाए जाने का कारण समझ से परे है.


महोदय, भारत के राजपत्र में प्रकाशित, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की 18 जुलाई 2018 की अधिसूचना में भी असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति के लिए API स्कोर की बाध्यता नहीं है. तो फिर उत्तराखंड सरकार और उत्तराखंड लोकसेवा आयोग का ज़ोर अचानक से API पर क्यूं बढ़ गया है ?


यह भी गौरतलब है कि 2016 के बाद उत्तराखंड में कोई राज्य पात्रता परीक्षा नहीं हुई है. उच्च शिक्षा में इस परीक्षा में बैठने के पात्र अभ्यर्थी, लगातार इस परीक्षा को कराये जाने की मांग करते रहे, श्रीमान उच्च शिक्षा मंत्री, राज्य पात्रता परीक्षा कराये जाने का बयान देते रहे, लेकिन यह परीक्षा नहीं कराई गयी. इस तरह असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति हेतु समुचित अर्हता हासिल करने के रास्ते में रोड़ा अटकाया गया.


महोदय, उक्त तमाम तथ्यों के आलोक में निवेदन है कि उत्तराखंड लोकसेवा आयोग द्वारा असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति के API की बाध्यता को समाप्त किया जाये और यह नियुक्ति उत्तराखंड द्वारा 2017 में अपनाई गयी नियुक्ति प्रक्रिया अथवा देश के अन्य राज्यों द्वारा अपनाई गयी नियुक्ति प्रक्रिया के तरीके की जाये.


उत्तराखंड के उच्च शिक्षित युवाओं के भविष्य के मद्देनजर, आपसे इस विषय में तुरंत निर्णय लेने की उम्मीद है.

सधन्यवाद,


सहयोगाकांक्षी

इन्द्रेश मैखुरी

गढ़वाल सचिव

भाकपा(माले)





(नोट  : उक्त ज्ञापन जिन्हें संबोधित है, उन्हें ईमेल और व्हाट्स ऐप के जरिये भेज दिया गया है ) 

 

Post a Comment

1 Comments

  1. ए.पी.आई. का अजीब अजूबा!

    ReplyDelete